Tuesday, 11 December 2012

दुर्गा सप्तशती यंत्र प्रयोग-२.


                               

                               शिव दर्शन साधना



mantra:-

                         ॥ ॐ ह्रीं श्रीं हर हर स्वाहा ॥

               ................॥ ॐ ह्रीं श्रीं हर हर स्वाहा ॥.................. 

                         ॥ ॐ ह्रीं श्रीं हर हर स्वाहा ॥

         ........................ ॥ ॐ ह्रीं श्रीं हर हर स्वाहा ॥

        ...........................॥ ॐ ह्रीं श्रीं हर हर स्वाहा॥....................... 

                         ॥ ॐ ह्रीं श्रीं हर हर स्वाहा ॥.....................................



21 माला मंत्र जाप किसी भी चतुर्दशी की तिथि से लेकर अगली चतुर्दशी तक कीजिये,सामने किसी भी प्रकार की शिवलिंग भी होनी चाहिये और दुर्गा सप्तशती यंत्र भी होनी चाहिये॰

सर्वप्रथम दुर्गा सप्तशती यंत्र की पूजन कीजिये,और माँ से शिवदर्शन की प्रार्थना कीजिये॰ अब कोई भी एक लाल रंग की पुष्प को हाथ मे पकड़कर निम्न मंत्र की 5-10 मिनिट तक जाप करनी है,

॥ ॐ क्लीं ह्रीं चंडीके मम कार्य सिद्धि कुरु कुरु ह्रीं क्लीं नम:॥


अब पुष्प को यंत्र पे चढ़ाते हुये फिर से शिवदर्शन की कामना कीजिये,अब 11 बार ॐ ह्रीं नम शिवाय ह्रीं ॐ मंत्र से शिवजी पर जल चढ़ाये फिर जल को ग्रहण करते हुये 

रं चैतन्यम जाग्रय जाग्रय रं फट 


मंत्र 3 बार बोलनी है,अब शिवपुजन कीजिये और शिवदर्शन प्राप्ति मंत्र की 21 माला जाप रुद्राक्ष माला से कीजिये,दिशा पूर्व या उत्तर ,वस्त्र सफ़ेद,साधना की समय ब्रम्हमुहूर्त या फिर रात्री मे 9:36 की बाद वाली कोई भी समय 12:36 से पहिले तक की,रोज साधना समाप्ती के बाद शिवजी पर 108 बिल्वपत्र चढ़ानी आवश्यक है,यह विधि नित्य कीजिये ।
आपकी शिवदर्शन की इच्छया अवश्य ही पूर्ण होगी………………………………..

गुरुकृपा ही केवलम......................................


जय निखिलेश्वर........................................................................................................

Saturday, 8 December 2012

दुर्गा सप्तशती यन्त्र साधना प्रयोग-1


दुर्गा सप्तशती यन्त्र विधान मैंने अभी अभी हमारे ग्रुप एडमिन जी के पास दी हुयी है,अब इसी विषय पर एक तंत्रोक्त नवग्रह शांति प्रयोग,ज्यो सिर्फ इसी यन्त्र सामग्री पर संभव है,और इस साधना में आवश्यक है मूंगा माला,इस प्रयोग बाद जीवन की सभी प्रकार की आनंद की अनुभूतिया संभव है,यह साधना मंगलवार दिवस  की शुक्ल पक्ष  से शुरू करतानी है,वस्त्र लाल रंग की होनी चाहिए,यह प्रयोग 11 दिन की है और 11 माला 2 समय जाप करनी है,सुबह में 5-7 की समय में और रात्रि में 9-11 बजे कि समय निच्चित है,दिशा पूर्व।
यह यन्त्र आपको जीवनभर कार्य में उपयोगी होगी,इसीलिए यन्त्र को ताम्र पत्र या फिर चांदी की पत्र पर अंकित करेगे तो अच्छी बात है।


मंत्र :-


                ॐ  ह्रीं नमो भगवती सर्व-द्रुष्टग्रहान बंधय बंधय स्वाहा ।।



नवग्रह साधना की क्या लाभ होनी चाहिये और होती है यह आप अच्छी तरह से जानते है।




गुरुकृपा ही केवलम ...................................

जय निखिलेश्वर .......................................................................

Thursday, 6 December 2012

भाग्य जागरण संभव है




हम लोग कई साधनाये करते है परंतु क्या किसिका भाग्य जागरण हुआ है, नहीं हुआ है और नहीं होगा क्यूकी मस्तिष्य मे एक भटकन है ज्यो आपको सफल नहीं होने देती है। जबकि मेरी भाषा मे भटकन से बड़ी इस दुनिया मे और कोई पाप है ही नहीं...........
एक छ्योटीसी कहानी बताती हु.

एक राजा थे जिनके पास बहोत ज्यादा संपत्ति थी और उनकी मित्रता देवी-देवताओ से थी,एक दिन राजा और शनि देव साथ मे किसी विशेष प्रकार एक खेल खेल-रहेते,तो उस समय शनि देव खेल मे हार गये और शनिजी पे सभी की हसी की कारण उन्हे बहोत ज्यादा गुस्सा आ गया,तब शनिजी ने राजा से कहा हे राजन , ज्यादा हसो मत कुछ ही डीनो मे मई तुम्हारी राशि मे आ रहा हु और तुम्हें मेरी साढ़ेसाती चालू हो जाएगी॰ परंतु तुम मेरे मित्र हो इसीलिये मेरी टेढ़ी दृष्टि से बचने की लिए तुम मुजे कोई भी एक वरदान मांगो,ताकि तुम्हें राहत मिले येसा कहेते हुये शनि देव अंतरध्यान हो गये। अब राजाजी सोच मे पद गए की येसे समय मे मई क्या कर सकता हु,तब उन्होने सोचा की मै यह बात अपनी तीनों रानियो को बताऊ ताकि वही हल निकाल दे।
राजाजी ने यह बात अपनी पहिली रानी को बताई तो इस पे उन्होने कहा की आप शनि देव जी से बहोत सारी धन मांगो,क्यूकी आपके पास धन रही तो आपको हर कोई मान-सम्मान देगे और राज्य भी अच्येसे चल सकेगी,सभी कार्य सुख-सुविधा से संपन्न होगे,हर सुख आपके पास होगी।
फिर यह बात उन्होने अपनी दूसरी रानी को बताई तो इस पे उन्होने कहा की आप शनि देवजी से उत्तम आरोग्य मांगिये,अगर आरोग्य ही न हो तो धन का क्या कर सकते,सारी धन तो स्वस्थ शरीर मे ही खर्च हो जायेगी
फिर यह बात उन्होने अपनी दूसरी रानी को बताई तो इस पे उन्होने कहा की आप शनि देवजी से उच्च कोटी की ज्ञान और सदबुद्धि मांगिये,अगर आपके पास ज्ञान व सदबुद्धि हो तो आरोग्य और धन की हानी कभी हो ही नहीं सकती
इस प्रकार से तीनों रानीयो की बात सुनकर राजा ने शनिदेवजी से उच्च कोटी की ज्ञान एवं सदबुद्धि की वरदान मांगी,राजा की कथन सुनकर शनिजी ने कहा हे राजन आप फिर से एक बार जीत गये, अब आपकी साढ़ेसाती मे कुछ भी हानी नहीं हो सकती है। जब मै आपको ज्ञान और सदबुद्धि दे दुगा तो आप मेरे हर कष्ट से बच जायेगे,क्यूकी जिसके पास ज्ञान और सदबुद्धि हो वह इस संसार मे कभी दुखी नहीं हो सकता,उसके पास हर बात से लढने की क्षमता होती है,मै ही नहीं बल्कि हम नवग्रह देवता हर प्राणी को येसी बुद्धि को चालना देते है की उसके हाथ से पाप हो जाता है या फिर वह सफलता से वंचित हो जाता है,वह अपने इष्ट से गुरु से मार्गदर्शक से भटक जाता है,और सारे दोष हमे या फिर अपने भाग्य को देता है,हम कभी किसिका नुकसान नहीं करते है सिर्फ उसकी बुद्धि को येसी चालना देते है की वह खुद ही खुद को बर्बाद कर देता है,वह हर बार अपनी बर्बादी का कारण खुद ही होता है हम नहीं और जिसके पास ज्ञान हो सदबुद्धि हो वह प्राणी इसी कारण से हर बार सफल हो जाते है,येसा कहकर शनि भगवान ने उन्हे आशीर्वाद प्रदान किया................................................

मै तो बस तना ही कह सकती हु की आप के पास येसी कुछ अनुभूतिओकी खदान है जैसे आप जानते थे की आप ज्योभी कार्य कर रहे है उनकी परिणाम क्या हो सकती है,जैसे परीक्षा नजदीक थी और आपको किसीसे प्रेम हुआ और आप फेल हुये या फिर नतीजा बुरा आया,तो यह करी है नवग्रहोका की उन्होने आपकी बुद्धि को येसी चालना दी की आप अपने मार्ग से ही भटक गये॰ जैसे आपकी कोई व्यवसाय है आप नयी माल खरीदना चाहते थे परंतु किसिने कह दिया अरे अभी तो मार्केट ठंडी है और फिर आपकी मानसिकता बदल गयी और कुछ दिन बाद आपको पता चला की आप ज्यो माल लेना चाहते थे अब उसकी कीमत बढ गयी फिर होगी पच्छ्याताप,तो येसी बहोत सारी उदाहरण है आपकी जीवन मे ज्यो आपसे ज्यादा बाकी लोग तो नहीं जानते है॰
ये तो आपकी हाथ मे है की आप फिर शिव की पूजा करे या न करे शिव के पास तो सब को ही जाना है,एक बात शास्त्र मे पायी जाती है कण-कण मे शिव है’’,अगर यह बात सच है तो आप कोई भी शिवलिंग पे साधना कीजिये सफलता मिलेगी,फिर चाहे वह पारद हो या मट्टी की शिवलिंग हो॰ आप किसिभी देवी/देवता की भी पूजन करेगे मतलब शिवपूजन अपने आप मे ही सम्पन्न हो गयी। तो इसी प्रकार से हर बार कही न कही हम बुद्धि की अयोग्य गति से सामना करेते है,अभी हम इस विषय पे सोच सकते है की भाग्य जाग्रण क्रिया किस प्रकार से हो सकती है,आनेवाली नव-वर्ष पर नयी चेतना एवं नयी उस्ताह की साथ भविष्य की नियोजन करनी ही है,और यह सफर साधनाये तहे करेगी और इस बार इस साधना की सामाग्री यही होगी की आपकी अमूल्य समय किसिभी कार्य से पहिले सोचने-समजने की लिए देनी है
ज्यादा कुछ लिखुगी तो शायद आपकी यह सोच बन जायेगी की आजकल ये क्या बात हो रही है,सभी लोग अपनी लेख की माध्यम से बोर कर रहे है,अब बहन ने भी यह कार्य की शुरुवात कर दी..........................


इसमे कुछ बाते अछि भी हो सकती है कुछ गलत भी लग सकती है परंतु आपको ज्यो भी सही लगे शायद वही सत्य है,अब एक ही कार्य करनी है साधना ओ को आसान बनाइये कठिन नहीं,कोई भी साधना बिना सोचे-समजे मत कीजिये...................
अब यहा से आगे होगी नव-वर्ष के संकल्प की तय्यारिया,क्या आप साथ है इन तय्यरियोको पूर्ण करनेमे ?
गुरुकृपा ही केवलम, 



जय निखिलेश्वर........................................

Friday, 30 November 2012

साधनात्मक खजाना


साधनात्मक खजाना की सारी साधनाए आपको गूगल पे मिल जायेगी , मैंने सिर्फ इन में से कुछ साधनाए सर्च करकर यहाँ पे डाली है परन्तु ज्यो प्रभावी है बस वही यहाँ पे है। बाकिकी बकवास साधनाए ज्यो सिर्फ एक माध्यम है तंत्र की नाम पर पैसे कमाने की वह साधनाए नहीं डाली व आपके पास इन साधना ओ में सामग्री उपलब्ध हो तो अछी बात है और सामग्री ना भी हो तो चिंता ना करे,मानसिक रूप में ही सारी प्रयोग संपन्न कर लीजिये,अनुभूतियाँ अवश्य ही मिलेगी .............................................................................































कुछ हद तो ये मंत्र भी आपकी सहायता करेगी,विश्वास की साथ प्रयोग संपन्न कीजिये,क्या पता किस मंत्र से आपकी कौनसी कार्य सिद्ध हो जायेगी  ......................................................................................................




सदा खुश रहिये,आपकी मुस्कान ही आपकी तरक्की और सफलता है। 





जय निखिलेश्वर ...............................................................................

Friday, 23 November 2012

दुर्गा उपासना


जीवन की व्याख्या ही अपने आप मे एक कठिन बात है,साथ मे जीवन की सारी इच्छाये ही हमे पाप-पुण्य की और अग्रेसर करती है॰ कही येसी भी बाते है जिन्हे सिर्फ एक नाम दी जाती है जैसे ‘तंत्र या तन्त्रोक्त साधना’ पर क्या किसिने ये जान्ने की कोशिश की है की इस साधना की वास्तविकता क्या है ? शायद समय ही नहीं है किसिके पास,इसिलिये सारी साधनात्मक गलतिया हमारे ही नसीब मे लिखी गयी है,क्या मै ये पूछ सकती हु की साधक अपने पतन और प्रगति मे किस गति से चल रहे है। चलो जानेदो गलतिया भूलानेसे ही आगे प्रगति होगी। हमारे सदगुरुजी ने एक बात हमेशा कही है ‘‘माँ जगदंबा की इच्छा रही,तो हम इस साधना विषय पर आगे भी बात करेगे” और सदगुरुजी की इस बात से तो एक बात हमारे समज मे तो आहि जाती है की “ दुर्गा जी की उपासना ” कितनी महत्वपूर्ण है,मै तो सिर्फ इतना ही कहेना चाहती हु की चाहे दुनिया की लाखो साधनाये आप कर लीजिये परंतु अंतता आना है आपको माँ भगवती जी की शरण मे और सदगुरुजी की शरण मे। अगर आप ये बात जानते है तो फिर येसी भटकन क्यू चल रही है मस्तिष्य मे की नवरात्रि आयेगी तभी हम दुर्गाजी की साधना सम्पन्न करेगे , कोई contract sign की है क्या हमने माँ के साथ ? जब येसी कोई बात ना हो तो आज से ही दुर्गा उपासना आवश्यक है , हमने जन्म लेते समय पंचांग नहीं देखि थी और नहीं मृत्यु की समय देखने वाले है क्यूकी जीवन-मृत्यु कोई कहानी नहीं एक पूर्ण सत्य है तो ये बात भी समजनी आवश्यक है की दुर्गा उपासना भी एक पूर्ण सत्य है कोई भी कहानी नहीं। दुर्गा साधना मे मेरी अनुभूतिया आज तक तो 100% ही है आगे माँ जगदंबा की इच्छा । कोई भी भगवती साधक/साधिका विश्व-कल्याण की ही बात करेगे,स्वयं के कल्याण की नहीं , अगर उन्हे साधनात्मक अनुभूतिया हो तो । इस साधना मे कई प्रकार की अनुभूतिया मिलती ही है,संसार मे येसी कोई इच्छा ही बाकी नहीं रहेती है ज्यो हमे नवार्ण मंत्र जाप से ना मिले,नवार्ण साधना साभिकी प्रिय साधना है चाहे फिर वह शिव,विष्णु,ब्रम्ह,इन्द्र,सन्यासी,गृहस्थ या अन्य कोई देवी देवताये ही क्यू न हो। जब यह इतनी प्रिय साधना है तो बाकी साधनात्मक चिंतन तो नहीं होनी चाहिये, आपकी ध्येय आपको ही सोचनी है ताकि लक्ष्य प्राप्ति मे पूर्णता मिले ,मै तो ग्यारंन्टी और चुनौती के साथ बोल सकती हु की मनोकामना पूर्ति हेतु इस्से बड़ी कोई साधना इस पूरे संसार मे ही नहीं है , यह साधना हर मनोकामना पूर्ति की लिये सभी लोको मे प्रचलित साधना है , आज मै जहा तक भी पहोचि हु इस बात की सारी श्रेय मै गुरूसाधना और नवार्ण को ही देती हु अन्य साधना ओ को नहीं,मेरी सारी इच्छाये इन दो ही साधना ओ से मैंने पूर्ण होते हुये देखि है और हुयी ही है,जब येसी साधनाये आपके पास हो और फिर भी आप समस्याओसे ग्रसित है तो इस बात से मै बहोत ज्यादा दुखी हु ……………
इसी विषय पर अब तो आगे भी बात चलेगी,अब हम साधनात्मक बात करते है।
साधना सामग्री:- नवार्ण यंत्र , कार्य सिद्धि यंत्र , स्फटिक माला ,जगदंबा जी का भव्य चित्र , लाल वस्त्र , लाल आसन ।
नोट:ये मत सोचिये की आपके पास की सामग्री चैतन्य है या नहीं है,आपको तो सिर्फ यही बात सोचनी है की कही से भी यह सामग्री शीघ्र ही आपको प्राप्त हो जाये,सामग्री को चैतन्य करने की क्रिया की ज़िम्मेदारी मै लेती हु।

साधना विधि :-


ॐ नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम :।
नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता: प्रणता: स्म ताम ॥
यह मंत्र 11 बार बोलनी है ताकि साधनात्मक वातावरण चैतन्य बने,
शुद्धिकरण:-(एक-एक मंत्र उच्चारण की साथ जल पीनी है)
हाथ मे जल लेकर मंत्र बोलिए,
ॐ ऐं आत्मतत्वं शोधयामी नम: स्वाहा ॥
ॐ ह्रीं विद्यातत्वं शोधयामी नम: स्वाहा ॥
ॐ क्लीं शिवतत्वं शोधयामी नम: स्वाहा ॥
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सर्वतत्वं शोधयामी नम: स्वाहा ॥ (बोलते हुये हाथ धो लीजिये)


विनियोग:-


ॐ अस्य श्रीनवार्णमंत्रस्य ब्रम्हाविष्णुरुद्रा ऋषय:गायत्र्युष्णिगनुष्टुभश्छंन्दांसी , श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवता: , ऐं बीजम , ह्रीं शक्ति: , क्लीं कीलकम श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो प्रीत्यर्थे जपे विनियोग: ॥


विलोम बीज न्यास:-


ॐ च्चै नम: गूदे ।
ॐ विं नम: मुखे ।
ॐ यै नम: वाम नासा पूटे ।
ॐ डां नम: दक्ष नासा पुटे ।
ॐ मुं नम: वाम कर्णे ।
ॐ चां नम: दक्ष कर्णे ।
ॐ क्लीं नम: वाम नेत्रे ।
ॐ ह्रीं नम: दक्ष नेत्रे ।
ॐ ऐं ह्रीं नम: शिखायाम ॥
(विलोम न्यास से सर्व दुखोकी नाश होती है,संबन्धित मंत्र उच्चारण की साथ दहीने हाथ की उँगलियो से संबन्धित स्थान पे स्पर्श कीजिये)


ब्रम्हारूपन्यास:-


ॐ ब्रम्हा सनातन: पादादी नाभि पर्यन्तं मां पातु ॥
ॐ जनार्दन: नाभेर्विशुद्धी पर्यन्तं नित्यं मां पातु ॥
ॐ रुद्र स्त्रीलोचन: विशुद्धेर्वम्हरंध्रातं मां पातु ॥
ॐ हं स: पादद्वयं मे पातु ॥
ॐ वैनतेय: कर इयं मे पातु ॥
ॐ वृषभश्चक्षुषी मे पातु ॥
ॐ गजानन: सर्वाड्गानी मे पातु ॥
ॐ सर्वानंन्द मयोहरी: परपरौ देहभागौ मे पातु ॥
( ब्रम्हारूपन्यास से सभी मनोकामनाये पूर्ण होती है, संबन्धित मंत्र उच्चारण की साथ दोनों हाथो की उँगलियो से संबन्धित स्थान पे स्पर्श कीजिये )

 



ध्यान:-


खड्गमं चक्रगदेशुषुचापपरिघात्र्छुलं भूशुण्डीम शिर:
शड्ख संदधतीं करैस्त्रीनयना सर्वाड्ग भूषावृताम ।
नीलाश्मद्दुतीमास्यपाददशकां सेवे महाकालीकां
यामस्तौत्स्वपिते हरौ कमलजो हन्तुं मधु कैटभम ॥

अब हमे जितनी भी जानकारी माँ की प्रति है उसी हिसाब से उनकी नित्य ध्यान और स्तुति करनी है,


निम्न मंत्र 21 बार बोलनी है,


ॐ ह्रीं सर्वबाधा प्रशमनं ,त्रैलोकस्याखिलेश्वरी ।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरि , विनाशनम ॥ ह्रीं ॐ ॥ फट स्वाहा: ॥



माला पूजन:-जाप आरंभ करनेसे पूर्व ही इस मंत्र से मालाकी पुजा कीजिये,इस विधि से आपकी माला भी चैतन्य हो जाती है ॰

“ऐं ह्रीं अक्षमालिकायै नंम:’’

ॐ मां माले महामाये सर्वशक्तिस्वरूपिनी ।
चतुर्वर्गस्त्वयि न्यस्तस्तस्मान्मे सिद्धिदा भव ॥
ॐ अविघ्नं कुरु माले त्वं गृहनामी दक्षिणे करे ।
जपकाले च सिद्ध्यर्थ प्रसीद मम सिद्धये ॥

ॐ अक्षमालाधिपतये सुसिद्धिं देही देही सर्वमन्त्रार्थसाधिनी साधय साधय सर्वसिद्धिं परिकल्पय परिकल्पय मे स्वाहा ।

नवार्ण मंत्र :-


                         !! ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे !!
                ( Aing hreeng kleeng chamundayei vicche )


जप पूरा करके उसे भगवतीजी की चरणोमे समर्पित करते हुए कहे


गुह्यातिगुह्यगोप्त्री त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम ।
सिद्धिर्भवतू मे देवी त्वत्प्रसादान्महेश्वरी ॥


नवार्ण मंत्र की सिद्धि 9 दिनो मे 1,25,000 मंत्र जाप से होती है,परंतु आप येसे नहीं कर सकते है तो रोज 3,5,7,11,21………….इत्यादि माला मंत्र जाप भी हम कर सकते है,इस विधि से सारी इच्छाये पूर्ण होती है,सारी दुख समाप्त होती है और धन की वसूली भी सहज ही हो जाती है। हमे शास्त्र की हिसाब से यह सोलह प्रकार की न्यास देखने मिलती है जैसे ऋष्यादी ,कर ,हृदयादी ,अक्षर ,दिड्ग ,सारस्वत ,प्रथम मातृका ,द्वितीय मातृका ,तृतीय मातृका ,षडदेवी ,ब्रम्हरूप ,बीज मंत्र ,विलोम बीज ,षड ,सप्तशती ,शक्ति जाग्रण न्यास और बाकीकी 8 न्यास गुप्त न्यास नाम से जानी जाती है,इन सारी न्यासो की अपनी एक अलग ही अनुभूतिया होती है,उदाहरण की लिये शक्ति जाग्रण न्यास से माँ सुष्म रूप से साधकोके सामने शीघ्र ही आ जाती है और मंत्र जाप की प्रभाव से प्रत्यक्ष होती है और जब माँ चाहे किसिभी रूप मे क्यू न आये हमारी कल्याण तो निच्छित है।
यहा से आगे भी एक और साधना हमे सदगुरुजी की असीम कृपा से सदगुरुजी की श्रीमुख से प्राप्त हुयी है,यह साधना बहुत ही अद्वितीय है। जिसे हमे आगे की साधनाओमे करनी है........
( नोट:-कृपया अनुष्ठान की रूप मे साधना करते समय कलश स्थापना आवश्यक मानी जाती है , इस बात की ध्यान रखिये )



गुरुकृपा ही केवलम, गुरुकृपा ही केवलम, गुरुकृपा ही केवलम………………………..








जय निखिलेश्वर....................

Tuesday, 20 November 2012

नशे से मुक्ति अभियान जरूरी है


आप सभी ने इतनि  प्रेम दियी  है मुजे की अब तो आपसे डिमांड बढ़ गयी है,और डिमांड ये है की भारत से नशे को भगाने में मेरी मदत कीजिये।
हमारी तंत्र शास्त्र मे एक प्रयोग हमारी सामने इस प्रकार से आती है की हमारी मनोकामनाये शत-प्रतिशत पूर्ण होती है परंतु इस बार हमे हमारे लिए नहीं बल्कि जिन्हे नशे ने जकड़ के रखा है उनके लिये यह तंत्र की प्रयोग करनी है,इसमे सिर्फ एक ही बात आवश्यक होती है वह है समय की ज्ञान ज्यो परफेक्ट हो,और यह योग इस बुधवार की दिन है।



साधना विधि:- किसी भी काले रंग की वस्त्र मे ७ लौंग की साथ जिस चीज से आप को नशे से मुक्ति पानि है या देनी है वह वस्तु (शराब की जगह शराब की शीशी शराब भरकर होनी चाहिये),और ३ कपूर की वडी ,एक पुष्प बांधकर रखनी है,अब अपनी मनोकामना बोलिये और यह पोटली खोल दीजिये,फिर एक पुष्प इस पोटली मे चढ़नी है,साथ मे कालभैरव जी से प्रार्थना भी करनी है की ‘’मै अमुक गोत्र का व्यक्ति अमुक व्यक्ति की अमुक बुरी आदत की लिये यह कालभैरव युक्त महाकाली प्रयोग सम्पन्न कर रहा हु/कर रही हु’’
अमुक गोत्र की जगह अपनि गोत्र बोलनी है और अमुक व्यक्ति जगह नशा करने वाली व्यक्ति की नाम।
और निम्न मंत्र की किसी भी तेल की दीपक की समाने लौ को देखते हुये ११ माला मंत्र जाप रात्री मे ७-८ की बीच मे करनी है। साधना समाप्ती के बाद यह पोटली बांधकर किसी भी निर्जन स्थान मे डाल दीजिये परंतु दक्षिण दिशा मे ।

मंत्र:-


              । ।  क्रीं क्रीं भ्रं भ्रं कार्य सिद्धिम भ्रं भ्रं क्रीं क्रीं फट । ।







गुरुकृपा ही केवलम , गुरुप्रसन्नता ही केवलम..............................



जय निखिलेश्वर............................................................