Monday, 30 July 2012

रुक्मिणी वल्लभ प्रयोग



                   यह प्रयोग समस्त संसार को सम्मोहित करने वाली तथा विशेष रूप में पति या पत्नी को अपनी मनोकुल बनाने की लिए श्रेष्ट प्रयोग है.यदि घर में अशांति ,कलह ,लड़ाई -झगड़ें ,मतभेद हो,तो इस प्रयोग को अवश्य ही करनी चाहिये | इस प्रयोग से मनोवांछित पति या पत्नी प्राप्त हो जाती है .इच्छानुसार प्रेमी या प्रेमिका मिलती है या सम्बन्ध दृढ़ हो  जाती है .पूर्ण गृहस्थ सुख की प्राप्ति भी होती है.
    यह अद्वितीय प्रयोग है,जो कृष्णजन्माष्टमी की रात्री में या फिर ग्रहण की रात्रि में संपन्न करने से सिद्ध हो जाती है.


विधि :-


            कृष्णजन्माष्टमी की रात्री में या फिर ग्रहण की रात्रि में साधक स्नान कर पूर्वाभिमुख होकर बैठ जाये और हाथ में जल लेकर उस कार्य को स्पष्ट करे जिसके लिए यह प्रयोग संपन्न की जा रही है.इसके बाद मुंगे की माला से निम्न मन्त्र की ५१ माला मन्त्र जाप करने से यह प्रयोग पूर्ण हो जाती है और कुछ ही दिनों में उचित सफलता की प्राप्ति होती है.


मंत्र :-





              ||  ॐ नमो भगवते रूक्मिणी वल्लभाय नाम: ||





      प्रयोग समाप्त होने पर माला को नदी में प्रवाहित कर दे .इस प्रकार यह प्रयोग संपन्न करने पर साधक अपनी गृहस्थ जीवन में पूर्ण अनुकूलता एवं सफलता प्राप्ति कर सकता है.वास्तव में ही यह मन्त्र अपने आप में अद्वितीय है.

       

        ............................................जय निखिलेश्वर......................................


Friday, 27 July 2012

पूर्वजन्म पाप दोष निवारण साधना


इस मंत्र को '' श्री गोरक्षनाथ शाबरी गायत्री मंत्र '' कहा जाता है,मंत्र पूर्णतः शुद्ध है और तीव्र भी है.

मंत्र:-

सत नमो आदेश | गुरूजी |ओम गुरूजी ओम कारे शिव रुपी संध्या ने साध रुपी मध्याने हंस रुपी हंस - परमहंस द्वी  अक्षर गुरु तो गोरक्ष काया तो गायत्री ओम तो ब्रम्हा सोऽहं तो शक्ति,शून्य तो माता ,अवगति पिता ,अभय पंथ अचल पदवी निरन्जर गोत्र अलील वर्ण विहंगम जाती असंख्य प्रवर अनन्त शाखा सूक्ष्म वेद .आत्मा ज्ञानी ब्रह्मज्ञानी श्री ओम गो गोरक्षनाथ विद्महे शून्य पुत्राय धीमहि तन्नो गोरक्ष निरंजन प्रचोदयात ,इतना गोरक्ष गायत्री पठयन्ते हरते पाप श्रूयते सिद्धि निश्चया जपन्ते परम ज्ञान अमृतानंद मनुष्याते |नाथजी गुरूजी को आदेश |आदेश |श्री सदगुरु निखिलेश्वरानंन्द नाथ जी के चरण कमल को आदेश |आदेश |

इस मंत्र को किसी भि पूर्णिमा से प्रारंभ कर सकते है,मंत्र जाप से पहिले सदगुरुजी से मानसिक रूप मे आज्ञा प्राप्त करनी जरुरी है,मंत्र जाप माला या बिना किसी माला से भी कर सकते है.जिनकी गुरुदीक्षा हुई है उन्ही लोगो को मंत्र का लाभ हो सकता है.

इस साधना से नवनाथ कृपा होकर पाप नष्ट होते है और परम ज्ञान कि प्राप्ति होति है.साधना काल मे शुद्धता का पालन महत्वपूर्ण है अन्यथा हानि भी होती है.ज्यादा विवरण देना संभव नहीं.क्युकी यह साधना करनी ही अनुभूतियो कि बात है.


जय निखिलेश्वर .........................................................................

Thursday, 26 July 2012

चमत्कारी मोहिनी प्रयोग



साधना विधि


बढ़िया सी इत्र की शीशी लीजिये ,और निम्न मंत्र को १०८ बार पढ़कर एक फूक शीशी के भीतर मारिये.इसी तरहा कुल एक हजार मंत्र पढ़ शीशी में दस फूक लग चुकी हो तो शीशी को किसी स्वच्छ स्थान पर रख दीजिये,उसी दिन शीशी की इत्र अन्दर ही अंदर चक्कर मारने लगेगी तब जान लीजिये की यह इत्र सिद्ध हो गयी है.फिर आप ईस इत्र की प्रयोग आपकी आवश्यकता की हिसाब से कर सकते है,और किसी भी स्त्री और पुरष को आप वश कर सकते है.
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use :-
यह सिद्ध इत्र की आपको जब भी प्रयोग करनी हो तो आप किसी भी स्त्री और पुरष की कपडे पर इत्र लगा दीजिये या सुंघा दीजिये तो वह व्यक्ति तुरंन्त ही वश में हो जाती है,यह बड़ी चमत्कारी प्रयोग है........................................
साधना शुक्रवार को करनी है.समय सुबह सूर्योदय से पाहिले.
आज तक तो कभी भी यह प्रयोग असफल नहीं हुयी है.
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मंत्र

|| अलहम्दोगवानी वो मेरेपर हो दीवानी जो न हो दीवानी सैयद कादर अब्दुल जलानी चुटटा पकड़कर दिवानी ||


नोट : प्रयोग की सफलता आपकी अच्छी कार्य की उपयोगिता पर निर्भर करती है,कृपया प्रयोग की इस्तेमाल कोई अच्छी कार्य की लिये कीजिये.और एक बारी में सफलता न मिली तो प्रयोग सिर्फ एक-दो बार फिर से कीजिये,क्युकी साधना करते समय कुछ कमी या त्रुटी रही तो असफलता मिल सकती है.
इसी विषय पर आगे और कुछ साधनाये देना चाहती हु.


जय निखिलेश्वर ............................................................................................

Tuesday, 24 July 2012

स्फ़टिक शिवलिंग-भाग्योदय साधना.

मनुष्य मूलत: पृथ्वी का ही भाग है,और इसी तत्व से उसमे मानसिक तथा शारीरिक स्थायित्व आती है.इस प्रकार स्फ़टिक पृथ्वि तथा अन्य तत्वो से ग्रहो से उर्जा ग्रहण कर मनुष्य मे पुन: सन्चारीत करने कि शक्ति रखती है.एक प्रकार से यह ''शक्ति केंन्द्र'' है,जो उर्जा को ग्रहण कर नियन्त्रित करती है.उसे इस प्रकार से प्रवाहीत करती है कि व्यक्ती उस उर्जा को ग्रहण कर सके और देह कि उर्जा मे गुणात्मक परिवर्तन कर सके.यहा तक कि उच्च कोटि के शिवलिंग स्फ़टिक शिवलिंग होते है.जिसके सामने बैठने मात्र से उर्जा भाव संचारित होति है.
किसी महा-शिवरत्रि कि शिवीर मे सदगुरुजीने तीन श्लोक बताये थे,ज्यो इस प्रकार है......................

स्फ़टिक लिंगमाराघ्यं सर्वसौभाग्यदायकम |
धनं धान्यं प्रतिष्ठाम च आरोग्यं प्रददाती स: ||
स्फटिक लिंगं प्रतिष्ठांप्य याजती यो पुमान |
रोगं शोकं च दारिद्रयं सर्व नश्चती तद गृहात ||
पूजनादास्य लिंगस्य अभ्यर्चनात सश्रध्दया |
सर्वपाप विनिर्मुक्तः शिव सायुज्यमाप्नुयात ||

साधना विधि :-

किसी भी सोमवार को स्फटिक शिवजी को अक्षत के आसन पे स्थापित कीजिये,दक्षिणमुख होकर आसन पर बैठे.फिर दूध,दही घी,शहद, और शक्कर से निम्न मंत्रो के साथ स्नान कीजिये .

ॐ शं सद्दोजाताय नम:दुग्धं स्नानं समर्पयामि |
ॐ वं वामदेवाय नम:दधि स्नानं समर्पयामि |
ॐ यं अघोराय नम:घृत स्नानं समर्पयामि |
ॐ नं तत्पुरुषाय नम:मधु स्नानं समर्पयामि |
ॐ मं ईशानाय नम:शर्करा स्नानं समर्पयामि |
 फिर शुद्ध जल से स्नान कीजिये तथा दुसरे पात्र में कुंकुंम से स्वस्तिक बनाकर शिवलिंग को स्थापित कीजिये.धुप दीप पुष्प तथा अक्षत आदि से ''ॐ नम:शिवाय'' बोलते हुए संक्षिप्त पूजन कीजिये.इसके बाद दूध से बने नैवेद्य का भोग अर्पित कीजिये.फिर शिवलिंग पर दुग्ध मिश्रित जल से अभिषेक करते हुए निम्न मंत्र की १००८ बार जप करे.

मंत्र :-
|| ॐ शं शंकराय स्फटिक प्रभाय ॐ ह्रीं नम:||

अभिषेक वाले जल देवता को प्रणाम करते हुए प्रसाद रूप में ग्रहण कीजिये,यह प्रयोग २१ दिन का है ,इसके बाद शिवालिंग जी को पूजा स्थान में स्थापित कर दीजिये.

आगे हम ''शिव दर्शन प्राप्ति'' साधना करेगे....


जय निखिलेश्वर.........................................................................................

Monday, 23 July 2012

मातंगी साधना.


प्रधान साधार विकल्प सत्ता स्वभाव भावद भुवन त्रयस्य |

सा विद्यया व्यक्तमपिहा माया ज्योतिः परा पातु जगंती नित्यं ||


दसमहाविद्या ओ मे भगवती मातंगी कि साधना अत्यंत सौभाग्यप्रद मानी जाती है,क्युकी यह केवल साधना ही नहीं अपितु सही अर्थो मे पुरे जीवन को आमूलचूल परिवर्तित कर देने कि ऐतिहासिक घटना है,इस साधना के बाद जीवन का कोई क्षेत्र अधूरा और शेष रहता ही नहीं है.ये बात किताबो मे आपको पढ़ने कि लिए मिल जायेगी परन्तु यह मेरी अनुभुतित साधना है,यह साधना संपन्न करने के बाद ही मुज़े हर क्षेत्र मे सफलता मिली है,

इस साधना के लाभ आज तक कभी पूर्ण स्पष्ट नहीं हो पाये ,क्युकी आप ज्यो भी इच्छा पूर्ती के लिए साधना करते है वह इच्छा पूर्ण हो जाती ही है,तो कैसे पता चलेगा कि इस साधना के कितने लाभ है.

मातंगी साधना कि सिद्धि पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वास पर आधारित है,अन्यथा अभीष्ट सिद्धि कि संभावना नहीं बनेगी.

अक्षय तृतीया के दिन ''मातंगी जयंती'' होती है और आनेवाली वैशाख पूर्णिमा ''मातंगी सिद्धि दिवस'' होता है.इन १२ दिनों मे आप चाहे उतना मंत्र जाप कर सकते है,अगर येसी कोई साधना आप कर रहे है जिसमे सिद्धि नहीं मिल रही है या फिर सफलता नहीं मिल रही है,तो इन १२ दिनों मे आपकी मनचाही साधना मे सिद्धि प्राप्ति कि इच्छा कीजिये और मातंगी साधना संपन्न कीजिये.सफलता ही आपकी दासी बन जायेगी.


विनियोग :-
अस्य मंत्रस्य दक्षिणामूर्ति हृषीविराट छंद : मातंगी देवता ह्रीं बीजं हूं शक्तिः क्लीं कीलकं सर्वाभीष्ट सिद्धये जपे विनियोगः |
ध्यान:-
श्यामांगी शशिशेखरां त्रिनयनां वेदैः करैविर्भ्रतीं ,
पाषं खेटमथामकुशं दृध्मसिं नाशाय भक्त द्विशाम |
रत्नालंकरण ह्रीं प्रभोज्ज्वलतनुं भास्वत्किरीटाम् शुभां ;
मातंगी मनसा स्मरामि सदयां सर्वार्थसिद्धि प्रदाम ||

मंत्र :-

|| ओम ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट स्वाहा ||



इस साधना मे माँ मातंगी का चित्र,यंत्र ,और लाल मूंगा माला का महत्व बताया गया है परन्तु सदगुरुजी ने किसी शिविर मे यह कहा था सामग्री समय पे उपलब्ध ना हो तो किसी स्टील या ताम्बे कि प्लेट मे स्वास्तिक बनाये और उसपे एक सुपारी स्थापित कर दे और उसेही यंत्र माने,आपके पास मातंगी का चित्र ना हो तो आप '' माताजी ''को ही मातंगी स्वरुप मे पूजन करे,माताजी तो स्वयं ही '' जगदम्बा '' है,और माला कि विषय मे स्फटिक,लाल हकिक,रुद्राक्ष माला का उपयोग हो सकता है.साधना दिखने मे ही साधारण हो सकती है परन्तु बहुत तीव्र है,कम से कम ११ माला जाप आवश्यक है.और कोई १२५० मालाये कर ले तो सोने पे सुहागा,आज तक इस साधना मे किसी को असफलता नहीं मिली है,इतने अच्छे योग निर्मित हुये है इस साधना के लिए और क्या चाहिये.


निखिल प्रणाम .............

Sunday, 22 July 2012

ऋण मुक्ति प्रयोग.


गुरुदेव प्रदत ऋण मुक्ति

मैं जहां एक बहुत ही सरल

अनुभूत साधना प्रयोग दे

रहा हु आप निहचिंत हो कर

करे बहुत जल्द आप इस अभिशाप

... से मुक्ति पा लेंगे !

विधि –

शुभ दिन जिस दिन

रविपुष्य योग

हो जा रवि वार हस्त नक्षत्र

हो शूकल पक्ष हो तो इस

साधना को शुरू करे

वस्त्र --- लाल रंग की धोतीपहन सकते है !

माला – काले हकीक की ले !

दिशा –दक्षिण !

सामग्री – भैरव यन्त्र

जा चित्र और हकीक

माला काले रंग की ! मंत्र संख्या – 12 माला 21

दिन करना है !

पहले गुरु पूजन कर आज्ञा लेऔर

फिर श्री गणेश

जी का पंचौपचार पूजन करे तद

पहश्चांत संकल्प ले ! के मैं गुरु स्वामी निखिलेश्वरा नन्द

जी का शिष्य अपने जीवन में

स्मस्थ ऋण मुक्ति के लिए

यहसाधना कर रहा हु हे भैरव

देव मुझे ऋण मुक्ति दे!जमीन पे

थोरा रेत विशा के उस उपर कुक्म से तिकोण बनाएउस में एक

पलेट में स्वास्तिक लिख कर उस

पे लालरंग का फूल रखे उस पे

भैरव यन्त्र की स्थापना करे

उस यन्त्र का जा चित्र

का पंचौपचार से पूजन करे तेल का दिया लगाए और भोग के

लिए गुड रखे जा लड्डू भी रख

सकते है ! मन को स्थिर रखते

हुये मन ही मन ऋण मुक्ति के

लिए पार्थना करे और जप

शुरूकरे 12 माला जप रोज करे इस प्रकार 21 दिन करे

साधना केबाद

स्मगरी माला यन्त्र और

जो पूजन किया है वोह समान

जल प्रवाह कर दे साधना के

दोरान रवि वार जा मंगल वार को छोटे

बच्चो को मीठा भोजनआदि जरूर

कराये ! शीघ्र ही कर्ज से

मुक्ति मिलेगी और कारोबार

में प्रगति भी होगी !

जय गुरुदेव !!


मंत्र—
ॐ ऐं क्लीम ह्रीं भमभैरवाये मम
ऋणविमोचनाये महां महा धन
प्रदाय क्लीम स्वाहा !!
- BY KUWAR RAVI RAJ BHAIYA..

Saturday, 21 July 2012

पूर्ण शिष्यत्व प्राप्ति साधना.

  यह साधना गुरुपूर्णिमा कि अवसर पे कि जा सकती है,साधना पूर्णता दुर्लभ और गोपनीय है और मेरी जीवन कि सबसे महत्वपूर्ण साधना है . जिस तरहा गुरु-शिष्य क सम्बध है उसी तरहा इस साधना का सम्बध मेरी प्राणो से जुडा हुआ है . यह साधना हमारे पिताश्री जी को सदगुरुजी के प्रिय शिष्य “ परम पुजनीय श्री योगी डालानन्दजी “ से 1999 प्राप्त हुयी थी . मेरी पापाजी कि व्याकुलता को देखते हुये यह साधना उन्हे प्रदान कि गयी थि और मैने 2004 मे पहीली बार सम्पन्न की थी.यह अदभूत साधना है जिस तरहा गुरु अपने शिष्यो को ज्ञान देकर पूर्णत्व प्राप्ति कि और अग्रेसर कर देते है उसी तरहा गुरुक्रुपा से यह साधना हमें शिष्य बनने कि और अग्रेसर बना देती है. हमारे ज्ञान मे वृद्धि कर देती है और विषेश बात ये है कि हमें सदगुरुजी से मार्गदर्शन प्राप्ती मे पूर्ण सफलता मिलती हि है इस बात मे कोइ शंका नहीं है . आप जब भी पूर्ण शिष्य बनना चाहेगे तो येही साधना आपको सद्गुरुजी का प्रिय शिष्य बना देगी .या फिर यह साधना नहीं करना चाहते है तो फिर ‘’ स्व-समर्पण ‘’ क्रिया हि काम आ सकती है जिसमे गुरुजी परीक्षा लेते हि है.यह बात डराने कि लिये नही है परंतु सच्चाइ है .

1) सदगुरुजी को गुरुकार्य करने वाले शिष्य/शिष्याये बहोत ज्यादा प्रिय है .
2) साधनाये सम्पन्न करने वाले शिष्य/शिष्याये भी बहोत ज्यादा प्रिय है .
3) दिक्षा लेने वाले शिष्य/शिष्याये भी बहोत ज्यादा प्रिय है .
यह अनुक्रमनिका है प्रिय शिष्य/शिष्या बनने की ,और यह बात सिर्फ किसी समर्पीत शिष्य/शिष्या मे ही देखने मिलेगी . इस साधना कि कुछ आवश्यक बाते ये है कि साधना मे प्रेमभाव ह्रिदय मे होनी चाहिये ताकी पूर्ण सफलता मिल सके.

साधना विधी :-
सर्वप्रथम ब्रम्हमुहुर्त मे स्नान कर लिजिये और साथ मे दैनिक गुरुपूजन एवं गुरुमंत्र कि 5 मालाये जाप करनी है.फिर कोइ येसा पात्र (स्टील कि बर्तन) लिजिये जिसे पानी से भर सके.इस पात्र के मध्य मे केशर से स्वास्तिक बनानी है और एक सुपारी स्वास्तिक कि मध्य मे स्थापित किजीये,अब इस पात्र को सुर्य यंत्र मानते हुये मानसिक सुर्य पूजन किजीये.पूजन के बाद पात्र मे जल भर दिजिये और जल देवता से प्रार्थना किजिये कि आपकी प्रत्येक इच्च्या पूर्ण हो.अब पात्र मे ज्यो स्वस्तिक बनाया है उसमे सुर्य भगवान (छवी) को देखिये ज्यो सुबह हम पानी देख सक्ते है,इसके लिये आपको साधना कि बैठने व्यवस्था मे adjustment  करनी होगि.फिर गुरुमंत्र कि मालासे 11 कम से कम मालाये निम्न मंत्र कि करनी है .और जाप करते समय हमारी द्रुष्टी स्वास्तिक पे होनि चाहिये .जाप करते समय अगर आंखोसे पानी निकले तो उन बुन्दो को पात्र मे गिरने दिजिये ताकी वह अश्रु हमारे प्यारे सद्गुरुजी कि श्रीचरणकमलोमे जल देवता कि माध्यम से पहोच जाये.

इस साधना मे सद्गुरुजी ने वचन दिया हुआ है कि “ आपकी यह अमुल्य अश्रु कि बुन्दे सिधे मेरी चरणोमे हि समर्पीत होगी “.....................

साधना समाप्ति कि बाद जल को किसी निर्जन स्थान पे विसरर्जीत किजीये.

साधना का समय सुबह 6:30 से 7:30 तक . 


mantra:-


॥ ॐ घ्रुणी परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नम : ॥

jay nikhileshwar.................................

शिव कृपा प्राप्ति साधना एवम दिप पूजन

  • यह एक दिन कि साधना है परन्तु पूर्ण फ़लदायी है और शिवकृपा प्राप्ति के लिये सबसे आसान साधना है.
    साधना विधी :-
                         सर्व प्रथम अपने सामने स्टील कि कोइ बडी प्लेट रखीये कि जिसमे कम से कम २१ दीपक रखने कि व्यवस्था उपलब्ध हो सके या फ़िर येसी प्लेट ना हो तो जमीन पर हि आप सफ़ेद कलर कि कोइ वस्त्र बिछा दिजिये.अब वस्त्र के बिचो-बिच कोइ भि शिवलिन्ग स्थापीत किजिये और शिवजी कि आकार कि प्रकार उनकि आजु-बाजु मे दीपक स्थापित किजीये,दीपक लाल मिट्टि से बने हुये हो तो सोने-पे-सुहागा,अब शिवजी क ध्यान किजिये शाम्भवि मुद्रा मे .................
    ध्यान:-  
                               ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसम ,
                               रत्नाकल्पोज्ज्वलाड्गं परशुमृगवराभीति हस्तं प्रसन्नम ।
                               पदमासीनं समन्तात स्तुत्मरगणैव्याघ्रकृतिं वसानम ,
                               विश्वाद्दं विश्वन्धं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम ॥


                    अब सभि दीपक मे अग्णी प्रज्वलित कर दिजिये ,निम्न मन्त्र बोलते हुये .
         
                                 ओम अं अग्णये नम : । ओम रं वरदायै नम : ।
                             अब निम्न मन्त्र बोलते हुये शिवजी पर बिल्व पत्र चढायिये .
    ओम भवाय नम : । ओम मृड्गाय नम : । ओम रुद्राय नम : । ओम कालान्तकाय नम : । ओम नागेन्द्रहराय नम : । ओम कालकरणाय नम : । ओम लस्यप्रियाय नम : । ओम शिवाय नम : । ओम अग्णीरूपाय नम : ।
                                       प्रत्येक मन्त्र बोलते हुये शिवजि पर अक्षत चढाये .
    ओम शर्वाय नम : । ओम भवाय नम : । ओम महेशाय नम : । ओम उग्राय नम : । ओम भीमाय नम : । ओम ईशानाय नम : । ओम महादेवाय नम : । ओम भद्राय नम : । ओम अग्णीरूपाय नम : ।
                             एक-एक मन्त्र बोलते हुये शिवजी पर चन्दन मिश्रीत कुम्कुम चढाये.
    ओम अघोराय नम : । ओम शर्वाय नम : । ओम विरूपाय नम : । ओम विश्वरूपिणे नम : । ओम त्र्यम्बकाय नम : । ओम कपर्दीने नम : । ओम भैरवाय नम :। ओम शूलपाणये नम : । ओम ईशानाय नम : । ओम महाकालाय नम : । ओम अग्णीरूपाय नम : ।

                                       फ़िर निम्न मन्त्र को आधे घन्टे तक बिना माला जपें .
    मन्त्र:-
                                          || ओम ह्रीं शं त्र्यंबकं शिवा शिवाय ह्रीं शं ओम : ||


     ................................................जय निखिलेश्वर..............................................
नोट : यह कविता एक बार गुरूजी ने शिष्यों को सुनाई थी l इसमें साफ बताया गया हैं कि वे किस तरह के लोगों का साथ देते हैं l

मैं हूँ उनके साथ


मैं हूँ उनके साथ जो सीधी रखते अपनी रीढ़ l
मैं हूँ उनके साथ जो सीधी रखते अपनी रीढ़ ll
कभी नहीं जो तज सकते हैं अपना न्यायोचित अधिकार l
कभी नहीं जो सह सकते हैं, शीश नवाकर अत्याचार ll
एक अकेले हो या उनके साथ खड़ी हो भरी भीड़ l
मैं हूँ उनके साथ जो सीधी रखते अपनी रीढ़ ll

निर्भय होकर घोषित करते जो अपने उदगार विचार l
जिनकी जिह्वा पर होता हैं, उनके अंतर का अंगार ll
नहीं जिन्हें चुक कर सकती हैं आतताइयों की शमशीर l
मैं हूँ उनके साथ जो सीधी रखते अपनी रीढ़ ll

नहीं झुका करते जो दुनिया से करने को समझौता l
ऊँचे से ऊँचे सपने को देते रहते जो न्यौता ll
दूर देखती जिनकी पैनी आंख भविष्य का तम चीर l
मैं हूँ उनके साथ जो सीधी रखते अपनी रीढ़ ll

जो अपने कन्धों से पर्वत से अड़ टक्कर लेते हैं l
पथ की बाधाओं को जिनके पांव चुनौती देते हैं ll
जिनको बांध नहीं सकती हैं लोहे की बेडी जंजीर l
मैं हूँ उनके साथ जो सीधी रखते अपनी रीढ़ ll

जो चलते हैं अपने छप्पर के ऊपर लुका धर कर l
हार जीत का सौदा करते जो प्राणों की बाजी पर ll
कूद उदधि में नहीं पलट फिर ताका करते तीर l
मैं हूँ उनके साथ जो सीधी रखते अपनी रीढ़ ll

जिनको यह अवकाश नहीं हैं, देखे कब तारे अनुकूल l
जिनको यह परवाह नहीं हैं कब तक भद्रा कब दिक्शुल ll
जिनके हांथों की चाबुक से चलती हैं उनकी तक़दीर l
मैं हूँ उनके साथ जो सीधी रखते अपनी रीढ़ ll

श्री बगलामुखी अस्त्र

इस साधना के २ नाम है,कुछ लोग बगलामुखी अस्त्र साधना कहते है तो कुछ लोग बृहदभानुमुखी पञ्चमास्त्र भी कहते है,यह साधना हमारे पास हो और हमे शत्रु कभी परेशान करे येसा कभी हो नहीं सकता,जब बगलामुखी साधना मे सफलता ना मिले तो यह साधना बगलामुखी सिद्धि के लिए बड़ी सहाय्यक साधना है.इस मंत्र का एक-एक बीज तीव्र है,और मंत्र जाप कि अनुभूतिया कुछ ही समय मे मिलने लगती है.माँ बगलामुखी जी को नक्षत्र स्तंभीनी भी कहा जाता है इसीलिये इनकी साधना ग्रह दोष भी कम करती है ,शत्रु बाधा हो या फिर मुकदमा चल रहा हो या फिर किसी प्रकार कि तंत्र बाधा हो इस साधना से तो राहत मिलती ही है,इस साधना को संपन्न करने के बाद हर क्षेत्र मे जितने कि आदत लग जाती है,जीवन कि कई बड़ी समस्याये कुछ ही समय मे समाप्त हो जाती है.स्मरणशक्ति मे भी वृद्धि होती है.

साधना विधान :-
माँ बगलामुखी जयंती पर ब्रम्हमुहूर्त मे ही साधना संपन्न कीजिये और स्नान करने से पहिले जल मे थोड़ी हल्दी डाल दीजिये ,पीले रंग कि आसन,वस्त्र आवश्यक है,मुख पश्चिम दिशा कि और होना चाहिये.सामने किसी बाजोट पर पीले रंग कि वस्त्र बिछाये और गुरुचित्र के साथ माँ बग्लाजिका चित्र स्थापित कीजिये,हल्दी से रंगे हुये चावल कि ५ ढेरिया बनाये,हर ढेरी पे साबुत हल्दी कि गाठे स्थापित कीजिये और उनकी पूजन कीजिये ,और घी का दीपक जलाये.
गुरुमंत्र कि ५ मालाये करनी आवश्यक है,फिर निखिल कवच का १ पाठ कीजिये.और बिना किसी माला के ९० मिनिट निचे दिए हुये मंत्र का जाप कीजिये,मंत्र जाप से पूर्व ही संकल्प लेना है.


मंत्र:-
|| ओम ह्लाम् ह्लीम् ह्लुम् ह्लैम् हलौम् ह्ल: ह्रां ह्रीं हूं ह्रौं ह्रः बगलामुखी ह्लाम् ह्लीम् ह्लुम् ह्लैम् हलौम् ह्ल: ह्रां ह्रीं हूं ह्रौं ह्रः जिव्हां कीलय कीलय ह्लाम् ह्लीम् ह्लुम् ह्लैम् हलौम् ह्ल: ह्रां ह्रीं हूं ह्रौं ह्रः बुद्धि नाशय नाशय ह्लाम् ह्लीम् ह्लुम् ह्लैम् हलौम् ह्ल: ह्रां ह्रीं हूं ह्रौं ह्रः हूं फट स्वाहा ||
इस मंत्र विधान को फिर से एक बार रात्रि काल मे ९ बजे के बाद दौराना है,ताकि साधना मे पूर्ण सिद्धि प्राप्त हो .यह साधना संपन्न होने के बाद आप जब भी चाहो तब इस मंत्र का २१,५१,१०८...... बार उच्च्यारण करके कार्य मे सिद्धि प्राप्त कर सकते है.दूसरे दिन साधना सामग्री को जल मे प्रवाहित कर दे.
लक्ष्मी साधना से पहिले इस मंत्र का २१ बार जाप करनेसे पैसे व्यर्थ मे खर्च भी नहीं होते है और टिक कर भी रहते है......
निखिलप्रणाम.............................

Friday, 20 July 2012

ll श्री निखिलेश्वरानंद कवचम् ll

  • ll श्री निखिलेश्वरानंद कवचम् ll


    यह अद्भुत कवच गुरुदेव परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानन्द के तपोबल से प्रदीप्त महामंत्र है| प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नानोपरांत शुद्ध वस्त्र धारण कर संक्षिप्त गुरु पूजन कर इसका पाठ करने से साधक को सुरक्षा, आनंद, सौभाग्य तथा गुरुदेव का तेज प्राप्त होता है| दृढ़ निश्चय से युक्त हो शुद्ध अंतःकरण से संपन्न किया गया इस कवच का विधिवत् अनुष्ठान जीवन की विकटतम परिस्थितियों में भी साधक को विजय प्रदान करने में सक्षम है|

    शिरः सिद्धेश्वरः पातु ललाटं च परात्परः |
    नेत्रे निखिलेश्वरानन्द नासिका नरकान्तकः || १ ||

    कर्णौ कालात्मकः पातु मुखं मन्त्रेश्वरस्तथा |
    कण्ठं रक्षतु वागीशः भुजौ च भुवनेश्वरः || २ ||

    स्कन्धौ कामेश्वरः पातु हृदयं ब्रह्मवर्चसः |
    नाभिं नारायणो रक्षेत् उरुं ऊर्जस्वलोऽपि वै || ३ ||

    जानुनि सच्चिदानन्दः पातु पादौ शिवात्मकः |
    गुह्यं लयात्मकः पायात् चित्तंचिन्तापहारकः || ४ ||

    मदनेशः मनः पातु पृष्ठं पूर्णप्रदायकः |
    पूर्वं रक्षतु तंत्रेशः यंत्रेशः वारुणीँ तथा || ५ ||

    उत्तरं श्रीधरः रक्षेत् दक्षिणं दक्षिणेश्वर |
    पातालं पातु सर्वज्ञः ऊर्ध्वं मे प्राण संज्ञकः || ६ ||

    कवचेनावृतो यस्तु यत्र कुत्रापित गच्छति |
    तत्र सर्वत्र लाभः स्यात् किंचिदत्र न संशयः || ७ ||

    यं यं चिन्तयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्चितं |
    धनवान् बलवान् लोके जायते समुपासकः || ८ ||

    ग्रहभूतपिशाचाश्च यक्षगन्धर्वराक्षसाः |
    नश्यन्ति सर्वविघ्नानि दर्शानात् कवचावृतम् || ९ ||

    य इदं कवचं पुण्यं प्रातः पठति नित्यशः |
    सिद्धाश्रम पदारूढः ब्रह्मभावेन भूयते || १० |

|| श्री बगलामुखी समर्पणम् ||

ओम नमो श्रीबग्लामुखी - स्वरूपा ,
शत्रु संहार करो देवी अनुपा |
चरण तेरे कोमल कमल जैसे ,
जिसके ह्रदय मे वही देव जैसे ||
दुःख शुम्भ ने आ घेरा है मुज़को ,
मिटा क्लेश मैया भक्त कहे तुजको |
पीताम्बरा श्रीअपराजिता तू कहाई ,
जभी भक्त सुमरे तू करती सहाई ||
गदा - चक्र - पाश - शडख् हाथो सोहे ,
चतुर्भुज रूप तेरा शिव को मोहे |
योग दीक्षा हिन् को न होता ज्ञान तेरा ,
पूर्नाभीशिक्त भी न जान पाए धाम तेरा ||
राज-राजेश्वरी अमित बलशाली ,
सर्वार्थ पूर्ण करी श्री हंसकाली |
श्रीदिव्य सिद्ध धाम गुरु रूप धरी ,
जय श्री बागला शक्त मनोरथ पूर्ण करो ||
जिव्हा पकड़कर गदा उठाएं ,
पाश डाल शत्रु को मिटाए  |
उन्मत नेत्र बक वाहन सुहाए ,
भक्त रक्षा हेतु शीघ्र ही धाए ||
सिद्धि - भक्ति - पूर्ण को है विश्वास तेरा ,
ब्रम्हास्त्र मंत्र -रूप है आधार मेरा |
लोक- लाज -प्रपंच कर्म त्यागा ,
श्री बागला चरण कमल मन लागा ||

कुलदेवी कृपा प्राप्ति साधना

कुलदेवी सदैव हमारी कुल कि रक्षा करती है,हम पर चाहे किसी भी प्रकार कि कोई भी बाधाये आने वाली हो तो सर्वप्रथम हमारी सबसे ज्यादा चिंता उन्हेही ही होती है.कुलदेवी कि कृपा से कई जीवन के येसे कार्य है जिनमे पूर्ण सफलता मिलती है.
कई लोग येसे है जिन्हें अपनी कुलदेवी पता ही नहीं और कुछ येसे भी है जिन्हें कुलदेवी पता है परन्तु उनकी पूजा या फिर साधना पता नहीं है.तो येसे समय यह साधना बड़ी ही उपयुक्त है.यह साधना पूर्णतः फलदायी है और गोपनीय है.यह दुर्लभ विधान मेरी प्यारी गुरुभाई/बहन कि लिए आज सदगुरुजी कि कृपा से हम सभी के लिये.
इस साधना के माध्यम से घर मे क्लेश चल रही हो,कोई चिंता हो,या बीमारी हो,धन कि कमी,धन का सही तरह से इस्तेमाल न हो,या देवी/देवतओं कि कोई नाराजी हो तो इन सभी समस्या ओ के लिये कुलदेवी साधना सर्वश्रेष्ट साधना है.
सामग्री :-३ पानी वाले नारियल,लाल वस्त्र ,९ सुपारिया ,८ या १६ शृंगार कि वस्तुये ,खाने कि ९ पत्ते ,३ घी कि दीपक,कुंकुम ,हल्दी ,सिंदूर ,मौली ,तिन प्रकार कि मिठाई .

साधना विधि :-

सर्वप्रथम नारियल कि कुछ जटाये निकाले और कुछ बाकि रखे फिर एक नारियल को पूर्ण सिंदूर से रंग दे दूसरे को हल्दी और तीसरे नारियल को कुंकुम से,फिर ३ नारियल को मौली बांधे .
किसी बाजोट पर लाल वस्त्र बिछाये ,उस पर ३ नारियल को स्थापित कीजिये,हर नारियल के सामने ३ पत्ते रखे,पत्तों पर १-१ coin रखे और coin कि ऊपर सुपारिया स्थापित कीजिये.फिर गुरुपूजन और गणपति पूजन संपन्न कीजिये.
अब ज्यो पूजा स्थापित कि है उन सबकी चावल,कुंकुम,हल्दी,सिंदूर,जल ,पुष्प,धुप और दीप से पूजा कीजिये.जहा सिन्दूर वाला नारियल है वह सिर्फ सिंदूर ही चढ़े बाकि हल्दी कुंकुम नहीं इस प्रकार से पूजा करनी है,और चावल भी ३ रंगों मे ही रंगाने है,अब ३ दीपक स्थापित कर दीजिये.और कोई भी मिठाई किसी भी नारियल के पास चढादे .साधना समाप्ति के बाद प्रसाद परिवार मे ही बाटना है.शृंगार पूजा मे कुलदेवी कि उपस्थिति कि भावना करते हुये चढादे और माँ को स्वीकार करनेकी विनती कीजिये.
और लाल मूंगे कि माला से ३ दिन तक ११ मालाये मंत्र जाप रोज करनी है.यह साधना शुक्ल पक्ष कि १२,१३,१४ तिथि को करनी है.३ दिन बाद सारी सामग्री जल मे परिवार के कल्याण कि प्रार्थना करते हुये प्रवाहित कर दे.
मंत्र :-

|| ओम ह्रीं श्रीं कुलेश्वरी प्रसीद -  प्रसीद ऐम् नम : ||


साधना समाप्ति के बाद सहपरिवार आरती करे तो कुलेश्वरी कि कृपा और बढती है.

रोग बाधा निवारण साधना.(पाताल क्रिया)

यह साधना पाताल क्रिया से सम्बंधित है,इस साधना कि कई अनुभूतिया है,और साधना भि एक दिन कि है.कई येसे रोग या बीमारिया है जिनका निवारण नहीं हो पाता ,और दवाईया भि काम नहीं करती ,येसे समय मे यह प्रयोग अति आवश्यक है.यह प्रयोग आज तक अपनी कसौटी पर हमेशा से ही खरा उतरा है .
प्रयोग सामग्री :-
                        एक मट्टी कि कुल्हड़ (मटका) छोटासा,सरसों का तेल ,काले तिल,सिंदूर,काला कपडा .
प्रयोग विधि :-
                       शनिवार के दिन श्याम को ४ या ४:३० बजे स्नान करके साधना मे प्रयुक्त हो जाये,सामने गुरुचित्र हो ,गुरुपूजन संपन्न कीजिये और गुरुमंत्र कि कम से कम ५ माला अनिवार्य है.गुरूजी के समक्ष अपनी रोग बाधा कि मुक्ति कि लिए प्रार्थना कीजिये.मट्टी कि कुल्हड़ मे सरसों कि तेल को भर दीजिये,उसी तेल मे ८ काले तिल डाल दीजिये.और काले कपडे से कुल्हड़ कि मुह को बंद कर दीजिये.अब ३६ अक्षर वाली बगलामुखी मंत्र कि १ माला जाप कीजिये.और कुल्हड़ के उप्पर थोडा सा सिंदूर डाल दीजिये.और माँ बगलामुखी से भि रोग बाधा मुक्ति कि प्रार्थना कीजिये.और एक माला बगलामुखी रोग बाधा मुक्ति मंत्र कीजिये.
मंत्र :-
|| ओम ह्लीम् श्रीं ह्लीम् रोग बाधा नाशय नाशय फट ||
मंत्र जाप समाप्ति के बाद कुल्हड़ को जमींन गाड दीजिये,गड्डा प्रयोग से पहिले ही खोद के रख दीजिये.और ये प्रयोग किसी और के लिए कर रहे है तो उस बीमार व्यक्ति से कुल्हड़ को स्पर्श करवाते हुये कुल्हड़ को जमींन मे गाड दीजिये.और प्रार्थना भि बीमार व्यक्ति के लिए ही करनी है.चाहे व्यक्ति कोमा मे भि क्यों न हो ७ घंटे के अंदर ही उसे राहत मिलनी शुरू हो जाती है.कुछ परिस्थितियों मे एक शनिवार मे अनुभूतिया कम हो तो यह प्रयोग आगे भि किसी शनिवार कर सकते है.
जय निखिलेश्वर...................................................................................................

सिद्धाश्रम

सिद्धाश्रम अर्थात सिद्ध+आश्रम ,ज्यो सिद्धो कि भूमि है,ज्यो रुशियोकी कि तपस्थली है,ज्यो देवतओं कि पुण्य भूमि है,जहा हजारों वर्ष कि आयु प्राप्त योगी तपस्यारत तथा सशरीर विचरण करते है,ज्यो सुगंधमय ,सुरभिमय ,प्रान्श्येत्नामय है............
जहा करोडो गुना आनंद है,सौंदर्य हो और माधुर्य हो उसे शब्दों मे कैसे बाँधा जा सकता है ? उसकी महत्ता समज सकते है.........और उसे समजने कि क्रिया परिपूर्णता है,और यह परिपूर्ण हो जाने कि क्रिया सिद्धाश्रम जाने कि क्रिया है.

ज्यो भाई /बहन रोज गुरुमंत्र का जाप करते है और साथ मे ही कुछ आवश्यक साधनाए करते है,और उन्हें अपनी साधनाओ मे सफलता ना मिले तो वह साधक सिद्धाश्रम पंचम का पाट करे और साथमे अगर ''
ओम ह्रीं सिद्धाश्रमाय पुर्णात्व साफल्यम ह्रीं निं नम:''
मंत्र का जाप करे तो सफलता मे वृद्धि होती है,मंत्र कि शक्तिया बढती है,और सिद्धाश्रम के योगियोका साथ भी मिलता है व मार्गदर्शन भी मिलता है.यह मंत्र पूर्ण चैतन्य है.और अनुभुतित भी है.........................

आप सभी का इस ग्रुप मे स्वागत है,कृपया अनुशासन का पालन करे.
अपनी अनुभूतिया हमारे साथ मिलकर बाटे और हम सभी को प्रतिकक्षा है.......

साथ मे आप अपना ज्योतिषीय मार्गदर्शन भी करे..............

जय गुरुदेव,जय निखिलेश्वर,जय सिद्धाश्रम......................

कुन्जिका स्तोत्रं


कुन्जिका स्तोत्रं


शिव उवाच:-



शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम्‌।

येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः भवेत्‌॥1॥
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्‌।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्‌॥2॥
कुंजिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्‌।
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्‌॥ 3॥
गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्‌।
पाठमात्रेण संसिद्ध्‌येत् कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम्‌ ॥4॥
अथ मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौ हुं क्लीं जूं सः
ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा
॥ इति मंत्रः॥

नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि।
नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिन ॥1॥
नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिन ॥2॥
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे।
ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका॥3॥
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते।
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी॥ 4॥
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मंत्ररूपिण ॥5॥
धां धीं धू धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देविशां शीं शूं मे शुभं कुरु॥6॥
हुं हु हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः॥7॥
अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा॥
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा॥ 8॥
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मंत्रसिद्धिंकुरुष्व मे॥
इदंतु कुंजिकास्तोत्रं मंत्रजागर्तिहेतवे।
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति॥
यस्तु कुंजिकया देविहीनां सप्तशतीं पठेत्‌।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा॥
। इतिश्रीरुद्रयामले गौरीतंत्रे शिवपार्वती
संवादे कुंजिकास्तोत्रं संपूर्णम्‌ ।

कामख्या साधना

यह मंत्र वेदोक्त है और पुर्णता प्रभवि भि है, सिर्फ 3 हि दिन मे इस मंत्रा कि अनुभुतिया हमारे सामने आती है,इस साधनासे कइ अपुर्ण इच्याये त्वरित पूर्ण हो जाति है,परंतु मन मे अविश्वास जाग्रत हो तो साधना कि अनुभुतिया नहीं मिल पाति है, और ये साधना कम से कम 11 दिन तो करनि हि चहिये.
साधना किसी भि नवरात्रि मे कर सक्ते है, रोज मंत्र कि 108 बार पाठ मतलब 1 माला करनि है, आप चाहे तो अपनी अनुकुलता के नुसार 3, 5, या 11 मालाये भि कर सक्ते है,आसन लाल रंग कि हो वस्त्र कोइ भि हो सक्ति है,माला लाल हकिक या रुद्राक्ष कि.
मा भगवति या कामाख्या जि का चित्र स्थापित किजिये और चमेलि कि तेल का दिपक आवश्यक है,साथ मे साधना से पुर्व हि गुरुपूजन और गुरुमंत्रा कि जाप भि आवश्यक है,फिर कालभैरव मंत्रा कि 21 ,51 या 108 बार जाप भि आवश्यक है,और सद्गुरुजि से अपनि कामनापुर्ति हेतु प्रार्थना किजिये और कालभैरव जि से आज्ञा मांगिये.
॥ ॐ ह्रीम कालभैरवाय ह्रीम ॐ ॥
 अपनी मनोकामना का उच्यारन करते हुये एक लाल कनेर का फूल भगवति जि कि चरणोमे समर्पित किजिये और मंत्र जाप प्रारम्भ किजिये.

मंत्र : -
 ॐ कामाख्याम कामसम्पन्नाम कामेश्वरिम हरप्रियाम ।
       कामनाम देहि मे नित्यम कामेश्वरि नमोस्तुते ॥


जय निखिलेश्वर...........................................

नैकरी प्राप्ति मंत्र


नैकरी प्राप्ति साधना :-
Dhyan -
हे कामाक्षा । हे शिव शक्ति । करते हैँ हम भक्ति ।सुनलो भक्त की पुकार ,बेडा है मँझधार ।।चलाकर पतवार,लगा दो माँ पार । तुम्हे शंकर की आन ,सत गुरु का कहना मान ।। सहारा दे दो माँ ,हम हो रहे बेकार ।निराशा का अन्धकार ,दूर है किनार ।। दया - दृष्टि फेरो अम्बे ।बेडा करो पार ।दोहाई है,दोहाई है ,तुम्हारे चरणोँ मेँ माई दोहाई कामरूप दानी की,दोहाई हाडी दासी की ।
Mantra -

|| ॐ नमः भगबती पद्मावती ऋद्धि सिद्धि दायिनी ,दुःख दारिद्रय हारिणी श्रीँ श्रीँ ॐ नमः कामाक्षायै नमःह्रीँ ह्रीँ फट् स्वाहा ||
 vidhi :-

shanivar ki ratriko shani dev ka puja karke is mantra ka jap 10 mala kare.mantra jap pehele aur ant me gurumantra jap karna he.noukari ki interview dene ke liye jate samaya 7 baar ukt mantra padhke gou mata ka gud khilake jane se noukari milta he .
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2nd prayog-

या मुहम्मद दीन हजराफील भहक अल्लाह हो |
govt job icha jis bhai behen ka he woh iss mantra ka prayog kare.sukra bar se iss mantra ka jap suru karna hota he .mala munga ka ho. daily 11 mala jap kiya jata he.subah uthke kisi se bat chit na karte hue sawa pawo uddad ke aate ka roti banaye.aur use aanch se apne hatho se sekhe.roti ko 4 tukda kar de.4 tukdo me se 1 tukda ka phir se 11 tukda karna he.anuman lagakar pehele roti bana padega.sabhi tukdo ko ek safed rumal me rakhkar 11 mala is mantra ka jap karna he.bismillah aur darud jaror padhe.gurumantra toh karna hi he.pas me loban ka dhup jalte rehena chaiye.jap samapt hone ke baad 11 tukdo ko nadi ya talab me machlio ko khane de.aur jo 3 piece he usme se 1 tukda kuta ko khila de.dusra crow ko khilana he.3 piece raste me phek de.total 40 dinka prayog kare.mantra kisi bhi kitab se nahi milega.guru aur sishya parampara se jo mila he me wohi rakh raha hoon.
jay gurudev..............................


                                                                                                           BY - NAGARAJUN NIKHIL..........

GURU PADAMBUJ KALP SADHNA

आप सभी गुरुभाई/बहन के साथ मै अपनी साधनात्मक अनुभूति कहेना चाहती हू,
पहिले हमारे प्यारे सद्गुरुजी के साथ सेवा मे भाई ''योगेन्द्र निर्मोही'' जी रहेते थे,उन्होंने कुछ साधनात्मक रहस्य हमारे पापाजी से कही थी...........................
उसीमे इस साधना के भी बारे मे उन्होंने कुछ बाते बताई थी,और आज मै इस साधना के प्रति समर्पित ह,
येक दिन मेरी मन मे एह सवाल उठा क्या सद्गुरुजी से ३/०६/१९९८ के बाद कभी मेरी बात नहीं हो पायेगी,बहोत दिन तक मै यही सोचती रही,और ३-४ गुरुवार्तालाप कि साधनाए भी कि परन्तु कोई सफलता हाथ न आई,उस समय बहोत तडफ रही थी मै,सिर्फ एक छोटीसी बात करनी थी सद्गुरुदेवजी से कि ''मेरे प्यारे गुरुवार मै आपसे बहोत-बहोत प्रेम करती हू''रोज पूजा मै बैट कर रोटी थी उनके सामने ६ माह बित गये परन्तु आखोमे सिर्फ आसू ही थे,मेरी वह दशा देख मेरी माँ ने मुज़े पापाजी से बात करने के लिए कहा............
तब पापाजी ने समजाया अगर गुरूजी कि मर्जी हो तो आज भी उनसे बात हो सकती है और ''गुरु पादाम्बुज कल्प साधना'' बताई,और साधना समाप्ति के आखरी दिन जीवन मे पहली बार १९९८ के बाद गुरूजी ने मुज़े प्रत्यक्ष रूप मे दर्शन दिए और कहा ''क्या चाहती हो मुजसे'' उस समय मै उन्हें देख सिर्फ रो रही थी ''फिर गुरूजी ने कहा ''बेटा बस करो अब ६ माह से रो रही हो,अब तो थोडा हँसलो'',तब मैंने अपनी इच्छा गुरूजी को बताई ''हे गुरुवर आप मुज़े कोई भी आज्ञा दे,मै यही चाहती हू'' तब गुरूजी ने मुज़े आशीर्वाद देते हुये कहा,''ज्यो प्रेम कि भावना आज तुम्हरे दिल मे है वाही आखरी क्षण तक रखनी है'' और यह आज्ञा लेकर आज भी मै उनके ही चरनोमे समर्पित हू..................................
साधना विधि :-
यह साधना आप किसी भी गुरुवार से प्रारम्भ कर सकते है,और उस दिन पुष्प नक्षत्र हो तो अति शुभ.
साधना ब्रम्ह मुहूर्त मे ही करनी है,श्वेत वस्त्र होने चाहिये,सफ़ेद आसान,और दिशा उत्तर.
''ओम'' प्रणव बीज का ३ बार उच्च्यारण करे और यह भावना मन मन मे रखिये कि गुरूजी सिर्फ हमारे ह्रदय मे ही है और कही नहीं फिर गुरूजी का ध्यान कीजिये और उनसे दर्शन कि प्रार्थना करे......
सामने किसी स्टील कि प्लेट मे स्वास्तिक बनाये और उसपे गुरुपादुका स्थापित करे,पूर्ण गुरुपादुका पूजन भी कर लीजिए.और स्फटिक माला से निम्न मंत्र कि ५१ माला रोज १० दिन करनी है.............
मन्त्र :-
''ओम परम तत्वाय आत्म चैतन्ये नारायणाय गुरुभ्यो नम : ''
''om param tatway aatm chaitanye narayanay gurubhyo nam :''
jay sadgurudev................

अघोर भैरवी साधना

  • अघोर भैरवी साधना

    अगर दुर्भाग्य साथ न छोडे और हर कदम पर बाधा बनकर उपस्थित हो,हर तरफ से जिवन मे खूशीया कौन नहि चाहते है परंतु पूर्वजन्म के येसे भि दोष है हमारे ज्यो हमे रुलाते है,ज्यो हमे शिष्य नहि बल्कि अनुयायि बनाते है.अब तो इन सारि दोषो से लढना है,नहि तो ये दोष हमे ज्योतीष्यीयो के गुलाम बना देगे.गुरु और इष्ट मे अविश्वास का जन्म कर देगे.
    भगवान से भिक मांगना ये शिष्यो के कार्य नहि है.येसि अनुमति हमारे सदगुरुजी हमे नहि देते है..................................
    ’’ ब्रम्हांड से कह दो हमे भक्ति नहि साधना चाहिये ‘’ ये बात सद्गुरुजि ने कहि थि.....................
    जिवन मे खूशिया सदगुरुजी कि क्रुपा आर्शिवाद से हि मिल सकति है. और उन्हिकि क्रुपा से मिलि है  अघोर भैरवी साधना ज्यो अत्यंत प्रभावि है और जिवन कि सारि बाधाओको दुर कर देति है दोषो सहित.
    साधना सामग्री :- कालि हकीक माला, मट्टि का दीपक , काले वस्त्र और आसन ,कपूर .

    विधि :- सर्वप्रथम स्नान करके साधना मे प्रवेश किजिये ,दक्षिण दिशा कि और मुख करते हुये साधना करनी है. अघोर भैरवी साधना से पूर्व हि गुरुपूजन एवँ गुरुमंत्र जाप और निखिल रक्षा कवच कि पाठ आवश्यक है. मट्टि कि दीपक मे कपूर जलाये और अग्नि कि लौ को देखते हुये कालि हकिक माला से 9 मालाये जाप 8 दिन करनी आवश्यक है और 9 वे दिन हवन किजिये ( हवन मे आहुति के लिये काले तिल, लौंग, कालि मिर्च का हि उपयोग करे ) तभी साधना पूर्ण मानी जाति है ,यह साधना गुप्त नवरात्रि मे करनी है , किसि विशेष मनोकामना हेतु हम संकल्प ले सकते है.

    मंत्र : -

    ॥ ॐ अघोरे ऎँ घोरे ह्रीँ सर्वत: सर्वसर्वेभ्यो घोरघोरतरे श्री नमस्तेस्तु रुद्ररुपेभ्य: क्लीँ सौ: नम: ॥

    साधना समाप्ति के बाद माला को जल मे किसी भि काले वस्त्र मे एक नारियल और सुपारि कि साथ बान्धकर विसर्जित किजिये.और जिवन मे कोइ भि समस्या आये तो इसि दीपक मे थोडि कपूर जलाते हुये अपनि समस्या बोलकर थोडि मंत्रा जाप कर लिजिये किसी भि समय मे अनुकुलता प्राप्त होगि.
    इस साधना को करते समय मे बडि विचित्र अनुभूतिया देखनि मिल सकति है.ज्यो किसीके पास plz share मत किजिये.
    जय निखिलेश्वर...............................................................